म्युचुअल फंड में Exit load का मतलब एक ऐसा चार्ज है जो म्यूचुअल फंड से पैसे निकालने पर लिया जाता है। अलग-अलग म्यूचुअल फंड में अलग-अलग Exit load स्ट्रक्चर होते हैं। कुछ फंड एक महीने के भीतर बाहर निकलने पर चार्ज लेते हैं, जबकि अन्य एक साल के भीतर बाहर निकलने पर चार्ज लेते हैं। अधिकतम 1% Exit load लगाया जा सकता है।
उदाहरण के लिए, एचडीएफसी फंड निवेश के एक साल के भीतर अपना पैसा निकालने पर 1% Exit load लेता है। हालांकि, अगर आप एक साल के बाद फंड से बाहर निकलते हैं, तो आपको कोई Exit load नहीं देना होगा।
आज के समय म्युचुअल फंड में पैसा लगाना बहुत ही आसान हो चुका है और बहुत सारे लोग म्युचुअल फंड में पैसा लगा देते हैं लेकिन मैच्योरिटी टाइम पीरियड से पहले ही वह पैसे निकालने की आवश्यकता पड़ जाती है ऐसी हालत में म्युचुअल फंड एग्जिट लोड चार्ज लगता है , अगर आप भी जाना चाहते हैं एग्जिट लोड क्या है? exit load in mutual fund in hindi, एक्जिट लोड कितना लगता है? exit load meaning in hindi, चलिए विस्तार से जानते हैं
एक्जिट लोड क्या होता है? – Exit load in mutual fund in hindi
Exit load एक ऐसा चार्ज है जो म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) कंपनी द्वारा तब लिया जाता है जब आप किसी स्कीम से एक निश्चित अवधि के भीतर पैसे निकालते हैं। इसकी कैलकुलेशन रिडीम की जा रही यूनिट्स के NAV (Net asset value) के प्रतिशत के रूप में की जाती है। आम तौर पर, अगर आप इक्विटी फंड(Equity fund) में एक साल पूरा करने से पहले पैसे निकालते हैं तो Exit load लगाया जाता है।
म्युचुअल फंड में एक्जिट लोड का मतलब – Exit load meaning in hindi
म्युचुअल फंड में एग्जिट लोड का मतलब निकासी भार होता है जिसे ज्यादातर म्युचुअल फंड कंपनियां टाइम से पहले म्युचुअल फंड में से अपना पैसा निकालने पर किसी भी निवेशक से वसूलते हैं , अलग-अलग म्युचुअल फंड का एग्जिट लोड अलग-अलग होता है यह आपके निवेश किए गए प्लान के ऊपर निर्भर करता है।
म्युचुअल फंड में Exit load कब लगाया जाता है?
जब आप किसी म्यूचुअल फंड स्कीम से अपने निवेश को निकालते हैं या रिडीम करते हैं, तो Exit load लगाया जाता है। हालाँकि, Exit load कब लागू होता है, इसकी विशिष्ट शर्तें म्यूचुअल फंड और आपके द्वारा निवेश की गई स्कीम के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं। यहाँ कुछ सामान्य परिदृश्य दिए गए हैं:
एक निश्चित समय के अंदर:
कई म्यूचुअल फंड एक्जिट लोड लगाते हैं यदि आप अपने निवेश को कम अवधि के भीतर रिडीम करते हैं, जो आमतौर पर कुछ दिनों से लेकर एक साल तक होता है। यह शॉर्ट टर्म व्यापार को हतोत्साहित करने और लॉन्ग टर्म निवेश को बढ़ावा देने के लिए है।
मेच्योरिटी पीरियड से पहले:
कुछ म्यूचुअल फंड योजनाओं में, जैसे कि क्लोज-एंडेड फंड या टैक्स-सेविंग फंड(elss), एक अनिवार्य लॉक-इन पीरियड हो सकती है। यदि आप इस लॉक-इन पीरियड के पूरा होने से पहले अपने निवेश को रिडीम करते हैं, तो आप एक्जिट लोड के अधीन होंगे।
इन्वेस्टमेंट अमाउंट के आधार पर:
कुछ म्यूचुअल फंड में एक्जिट लोड स्ट्रक्चर हो सकती है जो इन्वेस्टमेंट अमाउंट के आधार पर भिन्न होती है। उदाहरण के लिए, बड़ी इन्वेस्टमेंट अमाउंट के लिए उच्च Exit load लागू हो सकते हैं।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि Exit load को आमतौर पर भुनाए जा रहे यूनिट के नेट एसेट वैल्यू (NAV) के प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है। होल्डिंग पीरियड बढ़ने पर प्रतिशत आम तौर पर घटता है, जिससे निवेशकों को लंबी अवधि तक निवेशित रहने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
अपने म्यूचुअल फंड निवेशों पर लागू विशिष्ट Exit load शर्तों को निर्धारित करने के लिए, आपको फंड हाउस द्वारा प्रदान किए गए स्कीम सूचना दस्तावेज़ (SID) या मुख्य सूचना ज्ञापन (KIM) का संदर्भ लेना चाहिए। यह दस्तावेज़ लागू प्रतिशत और होल्डिंग पीरियड सहित Exit load स्ट्रक्चर को रेखांकित करता है।
Exit load की कैलकुलेशन कैसे करें ? – exit load calculation in mutual fund
Exit load की कैलकुलेशन रिडीम की जा रही यूनिट्स के NAV (नेट एसेट वैल्यू) के प्रतिशत के रूप में की जाती है। यहाँ इसका विवरण दिया गया है:
- NAV: किसी खास तारीख पर म्यूचुअल फंड की प्रति यूनिट कीमत।
- Exit load प्रतिशत: यह म्यूचुअल फंड द्वारा निश्चित किया जाता है और होल्डिंग पीरियड के आधार पर भिन्न हो सकता है।
- रिडीम की गई यूनिट्स: आपके द्वारा बेची जा रही यूनिट्स की संख्या।
- कैलकुलेशन:
- Exit load = (NAV * रिडीम की गई यूनिट्स) * Exit load प्रतिशत
उदाहरण:
मान लें कि आप ₹50 के NAV और 1% के Exit load वाले म्यूचुअल फंड की 100 यूनिट्स रिडीम कर रहे हैं।
Exit load = (₹50 * 100) * 0.01 = ₹50
महत्वपूर्ण विचार:
- होल्डिंग पीरियड: Exit load प्रतिशत आमतौर पर आपके द्वारा निवेश को लंबे समय तक होल्ड किए जाने पर घटता है।
- फंड-विशिष्ट नियम: विशिष्ट Exit load विवरण के लिए हमेशा फंड के प्रॉस्पेक्टस को देखें।
कौन से कारक Exit load प्रतिशत को प्रभावित करते हैं?
म्यूचुअल फंड में Exit load प्रतिशत मुख्य रूप से होल्डिंग पीरियड से प्रभावित होता है, जो वह अवधि है जिसके लिए आप फंड में निवेशित रहते हैं। यह आमतौर पर इस तरह काम करता है:
- शॉर्ट-टर्म होल्डिंग: यदि आप अपनी यूनिट्स को कम अवधि में रिडीम करते हैं, जो आमतौर पर कुछ दिनों से लेकर एक साल तक होती है, तो Exit load प्रतिशत अधिक होता है। यह निवेशकों को फंड में अचानक प्रवेश करने और बाहर निकलने से हतोत्साहित करने के लिए है, जो इसके मैनेजमेंट को बाधित कर सकता है।
- लॉन्ग-टर्म होल्डिंग: जैसे-जैसे आपकी होल्डिंग पीरियड बढ़ती है, Exit load प्रतिशत धीरे-धीरे कम होता जाता है। यह निवेशकों को फंड के लॉन्ग टर्म विकास उद्देश्यों के साथ संरेखित करते हुए लंबी अवधि के लिए निवेशित रहने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए है।
Exit load प्रतिशत को प्रभावित करने वाले अन्य कारकों में शामिल हैं:
- फंड का प्रकार: इक्विटी फंड में डेट फंड या हाइब्रिड फंड की तुलना में अलग Exit load स्ट्रक्चर हो सकती है।
- फंड का निवेश उद्देश्य: टैक्स-सेविंग फंड जैसे विशिष्ट निवेश उद्देश्यों वाले फंड में लॉक-इन पीरियड और संबंधित Exit load हो सकते हैं।
- बाजार की स्थितियां: कुछ बाजार स्थितियों में, फंड हाउस निवेशकों को आकर्षित करने या बनाए रखने के लिए अस्थायी रूप से Exit load को माफ या कम कर सकते हैं।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि विशिष्ट Exit load प्रतिशत और होल्डिंग पीरियड स्लैब व्यक्तिगत म्यूचुअल फंड द्वारा निर्धारित किए जाते हैं और इसके स्कीम सूचना दस्तावेज़ (SID) में उल्लिखित होते हैं। निवेशकों को निवेश करने से पहले Exit load स्ट्रक्चर को समझने के लिए SID की सावधानीपूर्वक समीक्षा करनी चाहिए।
mutual fund me tax kitna lagta hai – म्यूचुअल फंड पर लगने वाला टैक्स
म्यूचुअल फंड पर टैक्स फंड के प्रकार और आपने अपने निवेश को कितने समय तक रखा है, इस पर निर्भर करता है। यहाँ मुख्य बिंदुओं का विवरण दिया गया है:
इक्विटी फंड पर टैक्स
आपके निवेश को कितने समय तक रखा जाता है, उसके आधार पर टैक्स लगाया जाता है। यदि एक वर्ष से कम समय के लिए रखा जाता है, तो लाभ को शॉर्ट टर्म माना जाता है और आपके इनकमकर स्लैब दर पर टैक्स लगाया जाता है। यदि एक वर्ष से अधिक समय के लिए रखा जाता है, तो लाभ लॉन्ग टर्म होता है और 10% (यदि लाभ ₹1 लाख से अधिक है) पर टैक्स लगाया जाता है।
डेट फंड पर टैक्स
आपके निवेश को कितने समय तक रखा जाता है, उसके आधार पर टैक्स लगाया जाता है। यदि तीन वर्ष से कम समय के लिए रखा जाता है, तो लाभ शॉर्ट टर्म होता है और आपके इनकमकर स्लैब दर पर टैक्स लगाया जाता है। यदि तीन वर्ष से अधिक समय के लिए रखा जाता है, तो लाभ लॉन्ग टर्म होता है और इंडेक्सेशन लाभों के साथ 20% पर टैक्स लगाया जाता है।
हाइब्रिड फंड पर टैक्स
कराधान फंड में इक्विटी और डेट के अनुपात पर निर्भर करता है। इक्विटी हिस्से पर इक्विटी फंड की तरह कर लगाया जाता है, और डेट हिस्से पर डेट फंड की तरह कर लगाया जाता है।
डिविडेंड डिसटीब्यूशन टैक्स (DDT):
यह कर म्यूचुअल फंड हाउस द्वारा निवेशकों को डिविडेंड वितरित करने से पहले चुकाया जाता है। हालाँकि, 2020 में DDT को समाप्त कर दिया गया था, और डिविडेंड अब आपकी कर योग्य इनकम में जोड़े जाते हैं और आपकी स्लैब दर पर टैक्स लगाया जाता है।
कैपिटल गेन टैक्स:
यह कर आपके द्वारा अपने म्यूचुअल फंड यूनिट बेचने पर होने वाले लाभ पर लगाया जाता है। दर फंड के प्रकार और होल्डिंग पीरियड पर निर्भर करती है, जैसा कि ऊपर बताया गया है।
सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT):
STT CHARGE यह कर इक्विटी फंड की बिक्री पर लगाया जाता है और वर्तमान में लेनदेन मूल्य का 0.025% है।
अपने म्यूचुअल फंड निवेश के बारे में व्यक्तिगत सलाह के लिए टैक्स एडवाइजर से परामर्श करना महत्वपूर्ण है।
म्यूचुअल फंड पर कितना Exit load लगता है?
म्यूचुअल फंड पर Exit load रिडीम की जा रही यूनिट की होल्डिंग पीरियड पर निर्भर करता है। म्यूचुअल फंड पर Exit load 1% तक हो सकता है, लेकिन यह विशिष्ट फंड और आपने कितने समय तक निवेश रखा है, इस पर निर्भर करता है।
कुछ फंड कम समय सीमा के भीतर निकासी करने पर अधिक Exit load चार्ज कर सकते हैं, जबकि अन्य एक निश्चित अवधि के बाद कोई Exit load नहीं ले सकते हैं।
उदाहरण:
अगर आप SIP में हर महीने ₹7,000 निवेश करते हैं और 12 महीने बाद ₹40,000 निकालते हैं, तो Exit load की कैलकुलेशन रिडीम की गई यूनिट्स और उनकी संबंधित होल्डिंग पीरियड के आधार पर की जाएगी। यहाँ कैलकुलेशन का विवरण दिया गया है:
- यूनिट्स की पहचान करें: FIFO (फर्स्ट इन फर्स्ट आउट) सिद्धांत के आधार पर निर्धारित करें कि कौन सी यूनिट्स रिडीम की गई थीं।
- Exit load की कैलकुलेशन करें: रिडीम की गई यूनिट्स के NAV से लागू Exit load प्रतिशत को गुणा करें।
महत्वपूर्ण विचार:
- होल्डिंग पीरियड: प्रत्येक यूनिट की होल्डिंग पीरियड लागू Exit load प्रतिशत निर्धारित करती है।
- फंड का प्रकार: अलग-अलग म्यूचुअल फंड स्कीम्स के लिए Exit load स्ट्रक्चर अलग-अलग हो सकते हैं।
- व्यक्तिगत परिस्थितियां: अनावश्यक Exit load चार्ज से बचने के लिए यूनिटों को भुनाने से पहले अपने निवेश लक्ष्यों और समय सीमा पर विचार करना आवश्यक है।